बाराबंकी में दिनदहाड़े हत्या

मुख्तार के पूर्व शूटर शोएब की बाराबंकी में दिनदहाड़े हत्या: 15 से ज्यादा गोलियों से छलनी की कार, इलाके में भारी तनाव
बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहां बेखौफ बदमाशों ने दिनदहाड़े पूर्व शार्प शूटर मोहम्मद शोएब उर्फ बॉबी की गोली मारकर हत्या कर दी। हमलावरों ने वारदात को अंजाम देने के लिए फिल्मी अंदाज में शोएब की कार को घेरा और उस पर 15 से अधिक राउंड फायरिंग की। गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका दहल गया।
मोहम्मद शोएब का नाम कभी मुख्तार अंसारी गैंग के बेहद करीबियों में गिना जाता था। वह चर्चित जेलर आर.के. तिवारी हत्याकांड में भी आरोपी रह चुका था। इस हत्याकांड के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और आपराधिक गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।
कैसे हुई वारदात? (चश्मदीदों की जुबानी)
जानकारी के अनुसार, घटना बाराबंकी के कोतवाली थाना क्षेत्र की है। शोएब उर्फ बॉबी अपनी कार से कहीं जा रहा था, तभी पहले से घात लगाए बाइक सवार हमलावरों ने उसे रास्ते में रोक लिया। चश्मदीदों के मुताबिक, हमलावरों की संख्या 2 से 3 थी और वे अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे।
जैसे ही शोएब की कार धीमी हुई, हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों की बौछार इतनी तेज थी कि शोएब को कार से निकलने या संभलने का मौका तक नहीं मिला। कार के शीशे चकनाचूर हो गए और शोएब का शरीर गोलियों से छलनी हो गया। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर हवा में हथियार लहराते हुए फरार हो गए।
कौन था मोहम्मद शोएब उर्फ बॉबी?
मोहम्मद शोएब का आपराधिक इतिहास काफी लंबा रहा है। उसे मुख्तार अंसारी गिरोह का एक वफादार और घातक शूटर माना जाता था। शोएब का नाम सबसे ज्यादा तब चर्चा में आया जब लखनऊ में जेलर आर.के. तिवारी की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। इस हाई-प्रोफाइल मामले में शोएब मुख्य आरोपियों में शामिल था।
हालांकि, पिछले कुछ समय से वह कानूनी पचड़ों और जेल से बाहर आने के बाद अपनी गतिविधियों को सीमित रखने का दावा कर रहा था, लेकिन पुलिस सूत्रों का कहना है कि वह अभी भी जमीन के कारोबार और आपसी विवादों में सक्रिय था।
गैंगवार की आशंका और पुलिस की कार्रवाई
हत्या की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग के आला अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और कार के आसपास से भारी मात्रा में खाली कारतूस बरामद किए गए हैं।
बाराबंकी पुलिस अधीक्षक (SP) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए पांच टीमें गठित कर दी हैं। पुलिस आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि हमलावरों के भागने के रूट का पता लगाया जा सके। प्राथमिक जांच में इसे ‘गैंगवार’ या पुरानी रंजिश का नतीजा माना जा रहा है। मुख्तार अंसारी की मौत के बाद उसके करीबियों पर होने वाले हमलों ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
इलाके में दहशत का माहौल
दिनदहाड़े हुई इस हत्या ने बाराबंकी पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। घटनास्थल के आसपास की दुकानें बंद हो गई हैं और स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। लोगों का कहना है कि अगर भीड़भाड़ वाले इलाके में इस तरह से फायरिंग हो सकती है
निष्कर्ष
मोहम्मद शोएब उर्फ बॉबी की हत्या उत्तर प्रदेश में अपराध की दुनिया के बदलते समीकरणों की ओर इशारा करती है। मुख्तार अंसारी के साम्राज्य के पतन के बाद क्या यह किसी नए गैंग के उदय की आहट है या पुरानी दुश्मनी का बदला? यह तो पुलिस जांच के बाद ही साफ हो पाएगा।

समानता के अधिकार के लिए भीम आर्मी का पैदल मार्च

समानता के अधिकार के लिए भीम आर्मी का पैदल मार्च

बाराबंकी: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के विनियम 2026’ को लेकर उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के कार्यकर्ताओं ने इन नियमों के समर्थन में कलेक्ट्रेट तक विशाल पैदल मार्च निकाला और प्रशासन के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
मुख्य बिंदु:
  • समानता की मांग: भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के खिलाफ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए यूजीसी के नए नियमों को बिना किसी देरी के लागू किया जाए।
  • सुप्रीम कोर्ट के स्टे का विरोध: प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन नियमों पर लगाए गए अंतरिम स्टे पर चिंता जताई। उनका कहना है कि यह ‘समानता का अधिकार’ सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है और इस पर रोक हटाना सामाजिक न्याय के लिए अनिवार्य है।
  • बढ़ते भेदभाव पर चिंता: भीम आर्मी के नेताओं ने आरोप लगाया कि 2019 से 2024 के बीच शैक्षणिक संस्थानों में भेदभाव के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने रोहित वेमुला और दर्शन सोलंकी जैसे छात्रों का उदाहरण देते हुए इसे ‘संस्थागत उत्पीड़न’ रोकने का एकमात्र जरिया बताया।
  • बड़े आंदोलन की चेतावनी: बाराबंकी में पैदल मार्च के बाद पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार और प्रशासन ने इन नियमों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया, तो संगठन लखनऊ कूच कर एक बड़ा आंदोलन शुरू करेगा।
पृष्ठभूमि:
यूजीसी ने 15 जनवरी 2026 से नए नियम लागू किए थे, जिसमें विश्वविद्यालयों को दलित और पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए विशेष सुरक्षा तंत्र बनाने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, सवर्ण समाज के कुछ संगठनों ने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए विरोध किया था, जिसके बाद मामला कानूनी प्रक्रिया में उलझ गया है।
बाराबंकी/लखनऊ: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के विनियम 2026’ को लेकर देश भर में घमासान मचा है। बाराबंकी में भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के कार्यकर्ताओं ने इस विनियम के समर्थन में सड़कों पर उतरकर अपना शक्ति प्रदर्शन किया। संगठन ने जिलाधिकारी आवास तक पैदल मार्च निकाला और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए इन नियमों को तुरंत प्रभावी बनाने की मांग की।
प्रमुख बिंदु और विवाद की वजह:
भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा कवच: भीम आर्मी के प्रदेश महासचिव और अन्य नेताओं का कहना है कि यह विनियम एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के खिलाफ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए एक अनिवार्य सुरक्षा कवच है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में कैंपस में जातीय उत्पीड़न के मामलों में 118% की वृद्धि देखी गई है।
सुप्रीम कोर्ट का स्टे: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इन नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए अंतरिम रोक (Stay) लगा दी है कि ये प्रावधान ‘अस्पष्ट’ हैं और इनका दुरुपयोग हो सकता है। भीम आर्मी इसी स्टे को हटाने की मांग कर रही है।
नगीना सांसद की हुंकार: भीम आर्मी के संस्थापक और नगीना सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर इस विनियम को सभी संस्थानों में लागू करने की अपील की है। उन्होंने 11 फरवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की घोषणा की है।
सवर्ण समाज का विरोध: दूसरी ओर, ‘सवर्ण सेना’ और सामान्य वर्ग के कई संगठनों ने इसे ‘काला कानून’ करार दिया है। उनका तर्क है कि ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई और विभाजन पैदा कर सकते हैं।
क्या है यूजीसी विनियम 2026?
यह नियम विश्वविद्यालयों को कैंपस में इक्विटी कमेटी (Equity Committee) और 24/7 हेल्पलाइन बनाने का निर्देश देता है। साथ ही, भेदभाव की शिकायतों पर 24 घंटे के भीतर कार्रवाई और 15 दिनों में समाधान सुनिश्चित करने की समय सीमा तय की गई है।
आगामी रणनीति: बाराबंकी के बाद भीम आर्मी अब राजधानी लखनऊ और भोपाल में बड़े घेराव की तैयारी कर रही है। संगठन ने चेतावनी दी है कि जब तक इन नियमों को लागू नहीं किया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

सोना और चांदी: कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट

आज 1 फरवरी 2026 को बजट के दिन भारतीय बाजारों में जबरदस्त हलचल देखी गई। वित्त मंत्री द्वारा आम बजट 2026 पेश किए जाने के साथ ही सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट (क्रैश) दर्ज की गई, वहीं शेयर बाजार में भी मुनाफावसूली और नए टैक्स प्रस्तावों के कारण हाहाकार मच गया।
सोना और चांदी: कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट
बजट 2026 से पहले और उसके दौरान कीमती धातुओं में भारी बिकवाली देखी गई। जानकारों के अनुसार, निवेशकों ने सुरक्षित निवेश से हाथ खींचकर मुनाफावसूली की है। 
  • चांदी (Silver): चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ गिरावट आई है। कल जो चांदी 4,20,000 रुपये प्रति किलो के स्तर पर थी, वह आज 2,91,000 रुपये तक लुढ़क गई। यानी 24 घंटों में करीब 1.29 लाख रुपये की कमी आई है।
  • सोना (Gold): सोने के भाव भी धड़ाम हुए हैं। एमसीएक्स (MCX) पर सोना 1,80,000 रुपये से गिरकर 1,50,849 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। इसमें लगभग 30,000 रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की गई。 
शेयर बाजार: बजट के दिन डूबे 11 लाख करोड़
रविवार होने के बावजूद आज शेयर बाजार बजट के लिए खुला रहा, लेकिन निवेशकों को बजट के कुछ प्रस्ताव (विशेषकर STT में बढ़ोतरी) रास नहीं आए। 
  • सेंसेक्स (Sensex): बीएसई सेंसेक्स 1,547 अंक (1.88%) गिरकर 80,723 पर बंद हुआ。
  • निफ्टी (Nifty): एनएसई निफ्टी 495 अंक (1.96%) टूटकर 24,825 के स्तर पर आ गया。
  • वजह: सरकार ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) पर लगने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को बढ़ाने का ऐलान किया, जिससे ट्रेडर्स में घबराहट फैल गई。 
न्यूज़ रिपोर्ट: बजट 2026 का बाजार पर असर
(newsinr.com के लिए विशेष पोस्ट)
हेडलाइन: बजट के झटके से सोना-चांदी पस्त, शेयर बाजार में भी मची अफरा-तफरी!
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट 2026 ने आज कमोडिटी और स्टॉक मार्केट दोनों को हिलाकर रख दिया। जहां एक तरफ चांदी 1.29 लाख रुपये सस्ती होकर खरीदारों के लिए खुशखबरी लाई, वहीं शेयर बाजार के निवेशकों के लिए आज का दिन नुकसान भरा रहा।
मुख्य बातें:
  1. STT में बढ़ोतरी: फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर STT 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है।
  2. भारी गिरावट: बजट भाषण के दौरान सेंसेक्स एक समय 2,300 अंक से ज्यादा टूट गया था।
  3. टॉप लूजर्स: सरकारी बैंक (PSU Banks), मेटल और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई। SBI और BEL जैसे शेयर 6% तक टूटे। 
ग्लोबल शेयर मार्केट: मुख्य अपडेट्स
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और वैश्विक मुद्रास्फीति (Inflation) की चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ‘रिस्क-ऑफ’ (Risk-off) मोड देखा गया। 
  • अमेरिका (US Market): शुक्रवार की गिरावट के बाद अमेरिकी बाजार दबाव में रहे। S&P 500 सूचकांक 6,932.61 पर बंद हुआ, जो 0.43% की गिरावट दर्शाता है। डाऊ जोंस (Dow Jones) भी 415 अंक गिरकर 48,655.88 के स्तर पर रहा।
  • यूरोप (European Market): लंदन का FTSE 100 सूचकांक विपरीत दिशा में चलते हुए 10,223.54 अंकों के साथ सकारात्मक बंद हुआ। हालांकि, अन्य यूरोपीय बाजारों में मुनाफावसूली का दौर जारी रहा।
  • एशिया (Asian Market): जापान का Nikkei 225 सूचकांक 53,322.85 पर रहा, जिसमें 0.10% की मामूली गिरावट दर्ज की गई। 
बजट 2026 और वैश्विक संकेतों का विश्लेषण
हेडलाइन: ग्लोबल मार्केट की सुस्ती और बजट के टैक्स झटके से सहमे निवेशक!
भारतीय शेयर बाजार में आज आई 1,547 अंकों की बड़ी गिरावट के पीछे केवल घरेलू बजट ही नहीं, बल्कि वैश्विक संकेत भी जिम्मेदार रहे। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारी अल्बर्टो मुसालेम ने संकेत दिए हैं कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती की तत्काल आवश्यकता नहीं है, जिससे वैश्विक तरलता (Liquidity) पर असर पड़ सकता है। 
निवेशकों के लिए मुख्य बातें:
  1. US Fed की सख्ती: फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को 3.50%-3.75% के स्तर पर स्थिर रखने के फैसले ने उभरते बाजारों (Emerging Markets) पर दबाव बढ़ा दिया है।
  2. डॉलर की मजबूती: अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से वैश्विक स्तर पर धातु (Gold-Silver) की कीमतों में सुधार और शेयर बाजारों में मुनाफावसूली देखी गई।
  3. भारत में विदेशी निवेश (FII): बजट में STT (Securities Transaction Tax) बढ़ाए जाने के बाद विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल सकते हैं, जिससे आने वाले हफ्तों में और अस्थिरता बनी रह सकती है। 

केंद्रीय बजट 2026-2027

बजट 2026-27: ‘विकसित भारत’ की ओर बढ़ते कदम, जानें आम आदमी से लेकर उद्योग जगत के लिए क्या हुआ खास?
नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 1 फरवरी 2026 को संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया। यह बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत @ 2047’ के विजन को मजबूती देने वाला माना जा रहा है। इस बजट में सरकार का मुख्य फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, मिडिल क्लास और ग्रामीण विकास पर रहा है।
इनकम टैक्स और मध्यम वर्ग: TCS में बड़ी कटौती
इस साल के बजट में इनकम टैक्स स्लैब (Tax Slabs) में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जो मध्यम वर्ग के लिए थोड़ा निराशाजनक हो सकता है। हालांकि, सरकार ने ‘आयकर अधिनियम 2025’ को 1 अप्रैल 2026 से लागू करने का निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य टैक्स प्रक्रिया को सरल बनाना है।
बड़ी राहत की बात यह है कि विदेश यात्रा और विदेशी शिक्षा/इलाज के लिए पैसे भेजने पर लगने वाले TCS (Tax Collected at Source) को 5-20% से घटाकर अब मात्र 2% कर दिया गया है। इससे विदेश जाने वाले पर्यटकों और छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांसपोर्ट: रफ्तार पर जोर
सरकार ने बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास के लिए पूंजीगत व्यय (Capex) को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ कर दिया है।
  • रेलवे: 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और 25,000 किलोमीटर के नए रेलवे ट्रैक बिछाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • जलमार्ग: देश में 20 नए जल मार्ग (Waterways) विकसित किए जाएंगे।
  • विमानन: छोटे शहरों को जोड़ने के लिए 50 नए हेलीपोर्ट और छोटे हवाई अड्डों का निर्माण किया जाएगा।
युवा, तकनीक और रोजगार
भारत को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक हब बनाने के लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 की घोषणा की गई है, जिसके लिए ₹40,000 करोड़ का फंड दिया गया है।
  • युवाओं के लिए कौशल विकास के तहत 1000 नई AVGC (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स) लैब्स बनाई जाएंगी।
  • MSME क्षेत्र के विकास के लिए ₹10,000 करोड़ का ‘विकास कोष’ स्थापित किया जाएगा।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
किसानों की आय बढ़ाने के लिए ‘नारियल संवर्धन योजना’ शुरू की गई है। साथ ही, कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित टूल्स के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विशेष सब्सिडी का प्रावधान है। पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के लिए भी नए बुनियादी ढांचे का प्रस्ताव है।
क्या सस्ता हुआ और क्या महंगा?
सस्ता (Sasta):
  • कैंसर की दवाएं (सीमा शुल्क में कमी)।
  • सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) की बैटरी।
  • मोबाइल फोन, जूते-चप्पल और कपड़े।
  • सोलर कुकर और ओवन।
  • CNG और एयरक्राफ्ट के पुर्जे।
महंगा (Mahanga):
  • शराब और तंबाकू उत्पाद।
  • स्टील और एल्युमीनियम स्क्रैप।
  • शेयर बाजार में F&O (Futures and Options) ट्रेडिंग (STT में बढ़ोतरी)।
  • कुछ आयातित खनिज और लग्जरी कारें।

बजट 2026: क्या हुआ महंगा? (Mahanga List)

सरकार ने राजस्व बढ़ाने और सट्टेबाजी (speculation) को कम करने के लिए कुछ क्षेत्रों में करों में बढ़ोतरी की है:

  • शेयर बाजार (F&O Trading): फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) पर STT (Securities Transaction Tax) में भारी बढ़ोतरी हुई है।

    • Futures: 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है।

    • Options: प्रीमियम पर कर 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है।

  • शराब और तंबाकू: तंबाकू उत्पादों, सिगरेट और शराब पर ‘सिन टैक्स’ (Sin Tax) और एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई गई है। सिगरेट की कीमतों में 20-40% तक की वृद्धि होने का अनुमान है।

  • मेटल और मिनरल्स: स्टील, एल्युमीनियम स्क्रैप, लौह अयस्क (Iron ore) और कोयला जैसे खनिजों पर कर और पेनल्टी में बदलाव से ये महंगे हो सकते हैं।

  • लग्जरी और आयातित कारें: कुछ चुनिंदा आयातित खनिजों और महंगी कारों पर कस्टम ड्यूटी में बदलाव के संकेत हैं।


मध्यम वर्ग और अन्य मुख्य घोषणाएं

  • इनकम टैक्स: फिलहाल मध्यम वर्ग के लिए पुराने या नए टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है (यथावत स्थिति)।

  • क्या सस्ता हुआ: कैंसर की दवाएं, जीवन रक्षक दवाएं, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और टीवी/माइक्रोवेव सस्ते होने की उम्मीद है क्योंकि इन पर कस्टम ड्यूटी घटाई गई है।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर: सरकार ने ₹12.2 लाख करोड़ का रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय (Capex) आवंटित किया है।

  • युवा और रोजगार: ‘एजुकेशन-टू-एम्प्लॉयमेंट’ (E2E) योजना और सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 पर जोर दिया गया है।

विशेष नोट: शेयर बाजार में STT बढ़ने की खबर के कारण आज बाजार (Sensex और Nifty) में भारी गिरावट देखी गई है।

निष्कर्ष
बजट 2026-27 राजकोषीय घाटे को 4.3% तक सीमित रखने के लक्ष्य के साथ एक संतुलित बजट दिखाई देता है। जहां एक ओर तकनीकी नवाचार (Innovation) पर जोर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाकर रोजगार के नए अवसर पैदा करने की कोशिश की गई है।

बाराबंकी: मायो मेडिकल कॉलेज में ‘खूनी संघर्ष’, खराब खाने की शिकायत पर चीफ वार्डन ने डॉक्टरों को लोहे की रॉड से पीटा; भारी बवाल

बाराबंकी: मायो मेडिकल कॉलेज में ‘खूनी संघर्ष’, खराब खाने की शिकायत पर चीफ वार्डन ने डॉक्टरों को लोहे की रॉड से पीटा; भारी बवाल

बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सफेदाबाद स्थित बोधिसत्व यूनिवर्सिटी (मेयो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) में हॉस्टल की बदहाली और मेस के घटिया खाने की शिकायत करना एमबीबीएस (MBBS) के इंटर्न डॉक्टरों को महंगा पड़ गया। आरोप है कि शिकायत से भड़के चीफ वार्डन ने अपने साथियों और सुरक्षाकर्मियों के साथ मिलकर डॉक्टरों पर जानलेवा हमला कर दिया, जिससे परिसर में करीब 2 घंटे तक भारी हंगामा हुआ।

क्या है पूरी घटना?

घटना शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 की बताई जा रही है। हॉस्टल में रहने वाले इंटर्न डॉक्टरों का आरोप है कि पिछले काफी समय से मेस में अस्वास्थ्यकर और गुणवत्ताहीन खाना दिया जा रहा था। इसके अलावा हॉस्टल में पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी भारी किल्लत थी।

जब एक डॉक्टर इसकी शिकायत लेकर चीफ वार्डन अवधेश यादव के पास पहुंचे, तो समाधान करने के बजाय वार्डन और वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। विवाद इतना बढ़ा कि वार्डन और उनके साथियों ने डॉक्टरों को दौड़ा-दौड़ाकर लोहे की रॉड और लाठी-डंडों से पीटा।

वीडियो वायरल: सिर पर आई गंभीर चोटें

सोशल मीडिया पर इस मारपीट का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वार्डन और बाउंसर डॉक्टरों पर हमला करते दिख रहे हैं। हमले में एक डॉक्टर के सिर पर लोहे की रॉड लगने से गहरा घाव हुआ है, जबकि कई अन्य डॉक्टरों के हाथ और पीठ पर गंभीर चोटें आई हैं। घायल डॉक्टरों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है।

2 घंटे तक चला डॉक्टरों का प्रदर्शन

मारपीट की खबर जैसे ही कैंपस में फैली, सैकड़ों की संख्या में एमबीबीएस छात्र और इंटर्न डॉक्टर एकत्र हो गए। उन्होंने अस्पताल की ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार कर दिया और प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। डॉक्टरों का कहना है कि:

  • कॉलेज प्रबंधन भारी-भरकम फीस वसूलता है, लेकिन सुविधाएं शून्य हैं।

  • छात्रों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।

  • शिकायत करने पर बाउंसरों के जरिए डराया-धमकाया जाता है।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

हंगामे की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस अधिकारियों ने आक्रोशित छात्रों को शांत कराया और मामले की जांच का आश्वासन दिया। कॉलेज की डायरेक्टर मधुरिका सिंह ने भी आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन का बयान
कॉलेज प्रशासन ने मामले की आंतरिक जांच कराने और हॉस्टल की व्यवस्थाओं में सुधार का आश्वासन दिया है। साथ ही कहा गया है कि दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।यह रही यू-ट्यूब पर उपलब्ध वायरल वीडियो (या रिपोर्ट वीडियो) जो बाराबंकी के मेयो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ में हुई इंटर्न डॉक्टर पर मारपीट / हंगामा को दिखाता है 👇

https://youtu.be/9d-Z2XpAxAI?si=ddUVcu7h1JeaGlvg

इस वीडियो में दावा किया गया है कि मेयो मेडिकल कॉलेज, बाराबंकी में एक इंटरन डॉक्टर पर वार्डन और अन्य लोगों द्वारा हमला किया गया है जब उसने हॉस्टल की खराब सुविधाओं और भोजन के बारे में शिकायत की थी, और इस मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

घटना का विवरण: संस्थान के इंटर्न डॉक्टरों द्वारा लंबे समय से मेस में परोसे जा रहे घटिया गुणवत्ता वाले भोजन और हॉस्टल में पानी की अनुपलब्धता की शिकायतें कॉलेज प्रशासन से की जा रही थीं। आज जब डॉक्टरों का एक प्रतिनिधिमंडल इस विषय पर वार्ता करने पहुँचा, तो कथित तौर पर चीफ वार्डन और वहां तैनात बाउंसरों ने उग्र होकर डॉक्टरों पर हमला कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने लोहे की रॉड और लाठी-डंडों का प्रयोग किया, जिसमें कई डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हुए हैं। एक डॉक्टर के सिर पर गंभीर चोट आने की सूचना है।

डॉक्टरों का विरोध: इस अमानवीय कृत्य के विरोध में संस्थान के समस्त डॉक्टरों और छात्रों ने तत्काल प्रभाव से ओपीडी (OPD) और इमरजेंसी सेवाओं का बहिष्कार कर दिया। करीब 2 घंटे तक चले भारी हंगामे के दौरान छात्रों ने ‘गुंडागर्दी नहीं चलेगी’ के नारे लगाए और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।

प्रशासनिक हस्तक्षेप: सूचना पाकर पहुंची स्थानीय पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लिया। फिलहाल कॉलेज परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पीड़ित डॉक्टरों ने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है और मेस अनुबंध को तत्काल निरस्त करने के साथ-साथ हमलावरों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।

2 घंटे तक कैंपस बना छावनी

  • विवाद की वजह: शनिवार दोपहर मेस में अत्यधिक खराब खाना परोसा गया था। डॉक्टर जब शांतिपूर्ण ढंग से इसकी शिकायत करने गए, तो मेस स्टाफ और बाउंसरों ने गाली-गलौज शुरू कर दी।

  • खूनी संघर्ष: देखते ही देखते बाउंसरों ने डॉक्टरों को घेर लिया और रॉड से हमला कर दिया। हमले में घायल डॉक्टरों के सिर और हाथों में गंभीर फ्रैक्चर की आशंका है।

  • हंगामा और जाम: मारपीट से आक्रोशित डॉक्टरों ने अस्पताल की सेवाओं को ठप कर दिया। करीब 2 घंटे तक कॉलेज परिसर में अफरा-तफरी का माहौल रहा।

Top 10 5g Phones Under 10k Rupees in 2026

2026 के टॉप 10 बजट स्मार्टफोन्स (₹10,000 के अंदर)

1. Redmi A4 5G
    • खासियत: किफायती 5G अनुभव।
    • स्पेसिफिकेशन: Snapdragon 4s Gen 2 प्रोसेसर, 6.88-इंच 120Hz डिस्प्ले, 50MP मुख्य कैमरा और 5160mAh बैटरी।

 

2. POCO M7 5G
  • खासियत: परफॉरमेंस और गेमिंग के लिए बेस्ट।

स्पेसिफिकेशन: Snapdragon 4 Gen 2 चिपसेट, 6GB रैम, 128GB स्टोरेज और प्रीमियम ग्लास बैक डिजाइन।

 

3. Motorola Moto G35 5G
  • खासियत: क्लीन सॉफ्टवेयर और स्टॉक एंड्रॉइड।

स्पेसिफिकेशन: 6.72-इंच FHD+ डिस्प्ले, 50MP+8MP डुअल कैमरा सेटअप और 5000mAh बैटरी के साथ स्टीरियो स्पीकर्स।

4. Samsung Galaxy F06 5G
  • खासियत: सैमसंग का भरोसा और डिस्प्ले क्वालिटी।
  • स्पेसिफिकेशन: MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर, 6.7-इंच की बड़ी स्क्रीन और 25W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट।

 

 

5. iQOO Z10 Lite 5G
  • खासियत: सबसे लंबी बैटरी लाइफ।
  • स्पेसिफिकेशन: इसमें 6000mAh की विशाल बैटरी दी गई है। साथ ही Dimensity 6300 प्रोसेसर और 90Hz रिफ्रेश रेट डिस्प्ले है।

 

6. Realme C63 5G
  • खासियत: स्लिम डिजाइन और ड्यूरेबिलिटी।
  • स्पेसिफिकेशन: IP54 रेटिंग (पानी और धूल से बचाव), 45W सुपरवूक चार्जिंग और MediaTek Dimensity 6300 चिपसेट।

 

 

7. Infinix Hot 50 5G
  • खासियत: स्टाइलिश लुक और ज्यादा रैम।
  • स्पेसिफिकेशन: 8GB तक वर्चुअल रैम का विकल्प, 128GB स्टोरेज और 50MP का AI कैमरा।

 

 

 

8. Lava Storm Play 5G
  • खासियत: भारतीय ब्रांड और ब्लोटवेयर-मुक्त अनुभव।
  • स्पेसिफिकेशन: Dimensity 6080 प्रोसेसर, क्लीन एंड्रॉइड इंटरफेस और प्रीमियम लुक वाला कैमरा मॉड्यूल।

 

 

9. Vivo Y28e 5G
  • खासियत: कैमरा ऑप्टिमाइजेशन।
  • स्पेसिफिकेशन: बेहतरीन पोर्ट्रेट मोड के साथ 13MP रियर कैमरा, 5000mAh बैटरी और स्टाइलिश लाइटवेट डिजाइन।

 

 

10. POCO C75 5G
  • खासियत: सबसे कम कीमत में 5G।

स्पेसिफिकेशन: ₹8,000 के आसपास की कीमत, Snapdragon 4s Gen 2 चिप और 6.88-इंच का विशाल डिस्प्ले।

बजट सेगमेंट में 5G हुआ आम
इस मूल्य वर्ग की सबसे बड़ी खासियत 5G नेटवर्क सपोर्ट है। 2026 तक, 5G चिपसेट वाले फोन जैसे Redmi A4 5GPOCO M7 5G, और Motorola Moto G35 5G अब 10,000 रुपये की सीमा में आसानी से उपलब्ध हैं। यह उपयोगकर्ताओं को भविष्य के लिए तैयार (future-proof) डिवाइस प्रदान करता है।
परफॉरमेंस और डिस्प्ले पर फोकस
बजट फोन अब स्लो नहीं हैं। POCO M7 5G और Redmi A4 5G जैसे मॉडल में Qualcomm Snapdragon 4 Gen 2/4s Gen 2 सीरीज के प्रोसेसर दिए गए हैं, जो रोजमर्रा के काम और हल्के गेमिंग के लिए पर्याप्त शक्ति प्रदान करते हैं। डिस्प्ले के मामले में भी सुधार हुआ है; 6.88-इंच तक की बड़ी स्क्रीन और 120Hz रिफ्रेश रेट, जो पहले महंगे फोन में मिलते थे, अब इन बजट डिवाइसों का हिस्सा हैं।
बैटरी और चार्जिंग में प्रगति
लंबी बैटरी लाइफ एक प्रमुख जरूरत है, जिसे निर्माताओं ने समझा है। iQOO Z10 Lite 5G 6000mAh की विशाल बैटरी प्रदान करता है, जबकि अन्य मॉडल जैसे Redmi A4 और Motorola G35 5000mAh की बैटरी के साथ आते हैं। Realme C63 5G जैसे कुछ मॉडल तो इस प्राइस रेंज में 45W की तेज चार्जिंग स्पीड भी देते हैं, जो एक गेम-चेंजर है।
कैमरा और डिजाइन
कैमरा प्रदर्शन में भी 50MP मुख्य सेंसर मानक बन गए हैं। Samsung Galaxy F06 5G और Vivo Y28e 5G बेहतर इमेज प्रोसेसिंग और अच्छे पोर्ट्रेट शॉट्स का वादा करते हैं। डिजाइन के मामले में, Infinix Hot 50 5G अपने स्टाइलिश लुक और वर्चुअल रैम विकल्पों के साथ ध्यान खींचता है, जबकि Lava Storm Play 5G ‘क्लीन एंड्रॉइड’ अनुभव और भारतीय ब्रांड का भरोसा देता है।

भारत कोकिंग कोल लिमिटेड IPO: निवेश करने से पहले जान लें ये 5 जरूरी बातें और जोखिम

भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) का आईपीओ (IPO) साल 2026 का पहला प्रमुख सरकारी निर्गम है। कोल इंडिया की इस सहायक कंपनी से जुड़ी विस्तृत जानकारी और वर्तमान स्थिति नीचे दी गई है:
आईपीओ की मुख्य जानकारी (Key Details)
  • प्राइस बैंड: ₹21 से ₹23 प्रति शेयर
  • इश्यू साइज: ₹1,071.11 करोड़ (यह पूरी तरह से ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) है, जिसमें प्रमोटर कोल इंडिया अपने शेयर बेच रही है)
  • लॉट साइज: 600 शेयर (रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश ₹13,800)
  • विशेष कोटा: कंपनी ने अपने कर्मचारियों के लिए ₹1 प्रति शेयर की छूट दी है। साथ ही, कोल इंडिया के शेयरधारकों के लिए 10% कोटा आरक्षित है (पात्रता: 1 जनवरी 2026 तक शेयर धारक होना अनिवार्य)। 
सब्सक्रिप्शन की स्थिति (12 जनवरी 2026 शाम तक)
दूसरे दिन की समाप्ति तक निवेशकों ने इस आईपीओ पर जबरदस्त उत्साह दिखाया है:
  • कुल सब्सक्रिप्शन: लगभग 30 से 33 गुना सब्सक्राइब हो चुका है।
  • श्रेणीवार मांग:
    • रिटेल निवेशक: ~25 गुना
    • NII (गैर-संस्थागत निवेशक): ~85 गुना
    • शेयरहोल्डर कोटा: ~39 गुना
    • QIB (संस्थागत खरीदार): ~0.69 गुना (आमतौर पर अंतिम दिन अधिक बोलियां लगती हैं) 
    • https://groww.in/blog/bharat-coking-coal-bccl-ipo-day-2
महत्वपूर्ण तारीखें (Important Timeline)
  • अंतिम तिथि (Closing): 13 जनवरी 2026
  • अलॉटमेंट (Allotment): 14 जनवरी 2026
  • रिफंड/शेयर क्रेडिट: 15 जनवरी 2026
  • लिस्टिंग तिथि (Listing): 16 जनवरी 2026 (NSE और BSE पर)
    • नोट: 15 जनवरी को महाराष्ट्र में स्थानीय चुनावों के कारण बाजार की छुट्टी होने से लिस्टिंग की प्रक्रिया में 19 जनवरी तक मामूली देरी की संभावना जताई जा रही है। 
ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP Update)
  • 12 जनवरी 2026 तक GMP ₹11.5 पर बना हुआ है।
  • इसका मतलब है कि शेयर ₹34.5 (₹23 + ₹11.5) पर लिस्ट हो सकता है, जो निवेशकों को लगभग 50% का लिस्टिंग गेन दे सकता है। 
कंपनी की वित्तीय स्थिति और भविष्य
  • मार्केट लीडर: BCCL भारत का सबसे बड़ा कोकिंग कोल उत्पादक है, जिसका वित्त वर्ष 2025 में घरेलू उत्पादन में 58.5% हिस्सा रहा है।
  • मुनाफा: वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का शुद्ध लाभ (PAT) ₹1,240.19 करोड़ रहा।
  • रणनीति: कंपनी अपनी वाशरी (Washery) क्षमता को 13.65 MTPA से बढ़ाकर 20.65 MTPA करने की योजना बना रही है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी। 
विशेषज्ञों की राय: अधिकांश ब्रोकरेज हाउस जैसे आनंद राठी और एसबीआई सिक्योरिटीज ने इसकी मजबूत बाजार पकड़ और आकर्षक मूल्यांकन (P/E ratio ~8.64x) को देखते हुए इसे ‘सब्सक्राइब’ करने की सलाह दी है। 
सलाहकार के तौर पर, भारत कोकिंग कोल आईपीओ पर निर्णय लेने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार करना आवश्यक है:
क्या आईपीओ में निवेश (सब्सक्राइब) करना चाहिए?
पेशेवर विश्लेषण (Pros):
  • आकर्षक वैल्यूएशन: ₹21-₹23 के प्राइस बैंड पर, कंपनी का P/E अनुपात लगभग 8.64x है, जो कि इसकी मूल कंपनी कोल इंडिया (10-11x P/E) की तुलना में सस्ता है।
  • मजबूत मार्केट लीडरशिप: BCCL भारत में कोकिंग कोल का सबसे बड़ा उत्पादक है। भारत के स्टील सेक्टर की वृद्धि के साथ कोकिंग कोल की मांग स्थिर रहने की उम्मीद है।
  • जबरदस्त सब्सक्रिप्शन: आईपीओ को गैर-संस्थागत और खुदरा निवेशकों से भारी प्रतिक्रिया मिली है (30 गुना से अधिक सब्सक्राइब)। यह बाजार में मजबूत विश्वास दिखाता है।
  • उच्च लिस्टिंग गेन की संभावना: ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) लगभग 50% का संकेत दे रहा है, जिससे लिस्टिंग पर अच्छा मुनाफा मिलने की संभावना है।
  • सरकारी स्वामित्व (PSU Factor): यह एक सरकारी कंपनी है, जिससे स्थिरता और पारदर्शिता का भरोसा मिलता है।
जोखिम (Cons/Risks):
  • पूरी तरह OFS (Offer for Sale): आईपीओ से जुटाया गया सारा पैसा प्रमोटर (कोल इंडिया) के पास जाएगा, कंपनी के पास नहीं।
  • सरकारी नीतियां: कोल सेक्टर सरकार की नीतियों और पर्यावरण नियमों के प्रति संवेदनशील है, जिससे भविष्य की आय प्रभावित हो सकती है।
  • कोकिंग कोल की कीमतों में उतार-चढ़ाव: वैश्विक कमोडिटी की कीमतें अस्थिर होती हैं।

हमारी सलाह (Recommendation):
कई ब्रोकरेज फर्मों और बाजार विशेषज्ञों ने इस आईपीओ को ‘सब्सक्राइब’ (Subscribe) करने की सलाह दी है।
यदि आप लिस्टिंग गेन (Listing Gain) की तलाश में हैं, तो यह आईपीओ आकर्षक लग रहा है क्योंकि GMP प्रीमियम मजबूत है।
दीर्घकालिक निवेश (Long-term investment) के लिए भी, कोयले की स्थिर मांग और कंपनी की बाजार स्थिति को देखते हुए, इसे पोर्टफोलियो में शामिल किया जा सकता है।

अस्वीकरण (Disclaimer):
यह विश्लेषण केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय लेने से पहले, कृपया एक प्रमाणित वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से परामर्श अवश्य लें और अपने स्वयं के शोध (due diligence) करें।

WPL 2026: यूपी वॉरियर्स ने RCB के सामने रखा 144 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य; दीप्ति-डॉटिन ने संभाला मोर्चा

नवी मुंबई: सोमवार को महिला प्रीमियर लीग (WPL) 2026 के पांचवें रोमांचक मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने टॉस जीतकर यूपी वॉरियर्स (UPW) के खिलाफ पहले गेंदबाजी करने का रणनीतिक फैसला किया। डीवाई पाटिल स्पोर्ट्स एकेडमी के मैदान पर, यह मैच शुरू में आरसीबी के पक्ष में जाता दिख रहा था, लेकिन यूपी की अनुभवी खिलाड़ियों ने पासा पलट दिया।
शुरुआत में लड़खड़ाई वॉरियर्स की पारी
यूपी वॉरियर्स की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। सलामी बल्लेबाज हरलीन देओल (11 रन) और कप्तान मेग लैनिंग (14 रन) क्रीज पर ज्यादा देर टिक नहीं सकीं और सस्ते में पवेलियन लौट गईं। आरसीबी की गेंदबाजों, खासकर नदीन डी क्लार्क और श्रेयांका पाटिल, ने शुरुआत में वॉरियर्स के मध्यक्रम को झकझोर कर रख दिया। एक समय यूपी का स्कोर 50 रन पर 5 विकेट था, जिससे लग रहा था कि टीम 100 रनों का आंकड़ा भी मुश्किल से छू पाएगी।
दीप्ति शर्मा और डिएंड्रा डॉटिन की 93 रनों की साझेदारी
जब टीम गहरे संकट में थी, तब उप-कप्तान दीप्ति शर्मा और अनुभवी ऑलराउंडर डिएंड्रा डॉटिन ने मोर्चा संभाला। दोनों खिलाड़ियों ने शानदार लचीलापन और आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए छठे विकेट के लिए 93 रनों की अटूट और मैच-बदलने वाली साझेदारी की।
दीप्ति शर्मा ने 35 गेंदों में नाबाद 45 रनों की उपयोगी पारी खेली, जिसमें धैर्य और आक्रामकता का बेहतरीन मिश्रण था। वहीं, डिएंड्रा डॉटिन ने 37 गेंदों में नाबाद 35 रन बनाकर उनका बखूबी साथ दिया। इस साझेदारी की बदौलत यूपी वॉरियर्स निर्धारित 20 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 143 रनों के सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचने में सफल रही।
आरसीबी के सामने 144 रनों की चुनौती
अब, स्मृति मंधाना की कप्तानी वाली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को यह मुकाबला जीतने और अपनी जीत की लय को बरकरार रखने के लिए 144 रनों का लक्ष्य हासिल करना है। आरसीबी की गेंदबाजी की बात करें तो, नदीन डी क्लार्क और श्रेयांका पाटिल दो-दो विकेट लेकर सबसे सफल गेंदबाज रहीं, जबकि लॉरेन बेल को एक विकेट मिला।
यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आरसीबी की मजबूत बल्लेबाजी लाइन-अप इस चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा कर पाती है या वॉरियर्स की गेंदबाज अपनी टीम को जीत दिलाती हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर गहराया संकट: ट्रंप की 500% टैरिफ की धमकी से बाजार में हड़कंप
नई दिल्ली/वॉशिंगटन | 8 जनवरी, 2026
साल 2026 की शुरुआत के साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिका के नवनिर्वाचित प्रशासन ने भारत सहित उन देशों पर कड़े रुख के संकेत दिए हैं जो रूस के साथ व्यापारिक संबंधों को जारी रखे हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में दिए गए एक बयान ने भारतीय शेयर बाजार और व्यापारिक गलियारों में सनसनी मचा दी है। News24 की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि रूस से तेल की खरीद जारी रहती है, तो अमेरिका भारतीय उत्पादों पर 500% तक का टैरिफ (आयात शुल्क) लगा सकता है।
शेयर बाजार में भारी गिरावट
इस खबर के सार्वजनिक होते ही भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखी गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही धड़ाम हो गए हैं। निवेशकों के बीच इस बात का डर है कि यदि अमेरिका इतने बड़े स्तर पर टैरिफ बढ़ाता है, तो भारतीय आईटी कंपनियों, फार्मास्यूटिकल्स और कपड़ा उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडा भारत जैसे रणनीतिक भागीदारों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है।
Hindi News24 के अनुसार, अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी इस कड़े रुख का समर्थन किया है, जिससे स्थिति और भी गंभीर होती दिख रही है। 
क्या है इस तनाव की मुख्य वजह?
इस तनाव का केंद्र ‘रूस-यूक्रेन संघर्ष’ और उसके बाद रूस पर लगाए गए प्रतिबंध हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। अमेरिका इसे रूसी अर्थव्यवस्था को मदद के रूप में देख रहा है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि जो देश रूस के साथ खड़े हैं, उन्हें अमेरिकी बाजार में व्यापार करने की कीमत चुकानी होगी।
भारतीय प्रतिक्रिया और कूटनीतिक प्रयास
भारत सरकार ने इस पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि भारत अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) पर अडिग रहेगा। भारत हमेशा से ही अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देता आया है। हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है ताकि व्यापारिक युद्ध (Trade War) जैसी स्थिति को टाला जा सके।
आम जनता और व्यापार पर असर
यदि 500% टैरिफ लागू होता है, तो:
  • निर्यात में कमी: भारत से अमेरिका जाने वाले सामान महंगे हो जाएंगे, जिससे निर्यातकों को बड़ा घाटा होगा।
  • रुपये की गिरावट: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया और अधिक कमजोर हो सकता है।
  • महंगाई: वैश्विक स्तर पर व्यापारिक अस्थिरता से घरेलू बाजार में भी चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। 
निष्कर्ष
आने वाले कुछ दिन भारत-अमेरिका संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं। क्या भारत रूस के साथ अपने संबंधों में बदलाव करेगा या अमेरिका अपने सख्त फैसलों पर पुनर्विचार करेगा? यह देखना दिलचस्प होगा। वर्तमान में, पूरी दुनिया की नजरें वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच होने वाली अगली उच्च-स्तरीय वार्ता पर टिकी हैं।

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