भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर गहराया संकट: ट्रंप की 500% टैरिफ की धमकी से बाजार में हड़कंप
नई दिल्ली/वॉशिंगटन | 8 जनवरी, 2026
साल 2026 की शुरुआत के साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिका के नवनिर्वाचित प्रशासन ने भारत सहित उन देशों पर कड़े रुख के संकेत दिए हैं जो रूस के साथ व्यापारिक संबंधों को जारी रखे हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में दिए गए एक बयान ने भारतीय शेयर बाजार और व्यापारिक गलियारों में सनसनी मचा दी है। News24 की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि रूस से तेल की खरीद जारी रहती है, तो अमेरिका भारतीय उत्पादों पर 500% तक का टैरिफ (आयात शुल्क) लगा सकता है।
शेयर बाजार में भारी गिरावट
इस खबर के सार्वजनिक होते ही भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखी गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही धड़ाम हो गए हैं। निवेशकों के बीच इस बात का डर है कि यदि अमेरिका इतने बड़े स्तर पर टैरिफ बढ़ाता है, तो भारतीय आईटी कंपनियों, फार्मास्यूटिकल्स और कपड़ा उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडा भारत जैसे रणनीतिक भागीदारों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है।
Hindi News24 के अनुसार, अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी इस कड़े रुख का समर्थन किया है, जिससे स्थिति और भी गंभीर होती दिख रही है। 
क्या है इस तनाव की मुख्य वजह?
इस तनाव का केंद्र ‘रूस-यूक्रेन संघर्ष’ और उसके बाद रूस पर लगाए गए प्रतिबंध हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। अमेरिका इसे रूसी अर्थव्यवस्था को मदद के रूप में देख रहा है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि जो देश रूस के साथ खड़े हैं, उन्हें अमेरिकी बाजार में व्यापार करने की कीमत चुकानी होगी।
भारतीय प्रतिक्रिया और कूटनीतिक प्रयास
भारत सरकार ने इस पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि भारत अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) पर अडिग रहेगा। भारत हमेशा से ही अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देता आया है। हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है ताकि व्यापारिक युद्ध (Trade War) जैसी स्थिति को टाला जा सके।
आम जनता और व्यापार पर असर
यदि 500% टैरिफ लागू होता है, तो:
  • निर्यात में कमी: भारत से अमेरिका जाने वाले सामान महंगे हो जाएंगे, जिससे निर्यातकों को बड़ा घाटा होगा।
  • रुपये की गिरावट: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया और अधिक कमजोर हो सकता है।
  • महंगाई: वैश्विक स्तर पर व्यापारिक अस्थिरता से घरेलू बाजार में भी चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। 
निष्कर्ष
आने वाले कुछ दिन भारत-अमेरिका संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं। क्या भारत रूस के साथ अपने संबंधों में बदलाव करेगा या अमेरिका अपने सख्त फैसलों पर पुनर्विचार करेगा? यह देखना दिलचस्प होगा। वर्तमान में, पूरी दुनिया की नजरें वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच होने वाली अगली उच्च-स्तरीय वार्ता पर टिकी हैं।

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