सोना और चांदी: कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट

आज 1 फरवरी 2026 को बजट के दिन भारतीय बाजारों में जबरदस्त हलचल देखी गई। वित्त मंत्री द्वारा आम बजट 2026 पेश किए जाने के साथ ही सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट (क्रैश) दर्ज की गई, वहीं शेयर बाजार में भी मुनाफावसूली और नए टैक्स प्रस्तावों के कारण हाहाकार मच गया।
सोना और चांदी: कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट
बजट 2026 से पहले और उसके दौरान कीमती धातुओं में भारी बिकवाली देखी गई। जानकारों के अनुसार, निवेशकों ने सुरक्षित निवेश से हाथ खींचकर मुनाफावसूली की है। 
  • चांदी (Silver): चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ गिरावट आई है। कल जो चांदी 4,20,000 रुपये प्रति किलो के स्तर पर थी, वह आज 2,91,000 रुपये तक लुढ़क गई। यानी 24 घंटों में करीब 1.29 लाख रुपये की कमी आई है।
  • सोना (Gold): सोने के भाव भी धड़ाम हुए हैं। एमसीएक्स (MCX) पर सोना 1,80,000 रुपये से गिरकर 1,50,849 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। इसमें लगभग 30,000 रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की गई。 
शेयर बाजार: बजट के दिन डूबे 11 लाख करोड़
रविवार होने के बावजूद आज शेयर बाजार बजट के लिए खुला रहा, लेकिन निवेशकों को बजट के कुछ प्रस्ताव (विशेषकर STT में बढ़ोतरी) रास नहीं आए। 
  • सेंसेक्स (Sensex): बीएसई सेंसेक्स 1,547 अंक (1.88%) गिरकर 80,723 पर बंद हुआ。
  • निफ्टी (Nifty): एनएसई निफ्टी 495 अंक (1.96%) टूटकर 24,825 के स्तर पर आ गया。
  • वजह: सरकार ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) पर लगने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को बढ़ाने का ऐलान किया, जिससे ट्रेडर्स में घबराहट फैल गई。 
न्यूज़ रिपोर्ट: बजट 2026 का बाजार पर असर
(newsinr.com के लिए विशेष पोस्ट)
हेडलाइन: बजट के झटके से सोना-चांदी पस्त, शेयर बाजार में भी मची अफरा-तफरी!
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट 2026 ने आज कमोडिटी और स्टॉक मार्केट दोनों को हिलाकर रख दिया। जहां एक तरफ चांदी 1.29 लाख रुपये सस्ती होकर खरीदारों के लिए खुशखबरी लाई, वहीं शेयर बाजार के निवेशकों के लिए आज का दिन नुकसान भरा रहा।
मुख्य बातें:
  1. STT में बढ़ोतरी: फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर STT 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है।
  2. भारी गिरावट: बजट भाषण के दौरान सेंसेक्स एक समय 2,300 अंक से ज्यादा टूट गया था।
  3. टॉप लूजर्स: सरकारी बैंक (PSU Banks), मेटल और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई। SBI और BEL जैसे शेयर 6% तक टूटे। 
ग्लोबल शेयर मार्केट: मुख्य अपडेट्स
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और वैश्विक मुद्रास्फीति (Inflation) की चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ‘रिस्क-ऑफ’ (Risk-off) मोड देखा गया। 
  • अमेरिका (US Market): शुक्रवार की गिरावट के बाद अमेरिकी बाजार दबाव में रहे। S&P 500 सूचकांक 6,932.61 पर बंद हुआ, जो 0.43% की गिरावट दर्शाता है। डाऊ जोंस (Dow Jones) भी 415 अंक गिरकर 48,655.88 के स्तर पर रहा।
  • यूरोप (European Market): लंदन का FTSE 100 सूचकांक विपरीत दिशा में चलते हुए 10,223.54 अंकों के साथ सकारात्मक बंद हुआ। हालांकि, अन्य यूरोपीय बाजारों में मुनाफावसूली का दौर जारी रहा।
  • एशिया (Asian Market): जापान का Nikkei 225 सूचकांक 53,322.85 पर रहा, जिसमें 0.10% की मामूली गिरावट दर्ज की गई। 
बजट 2026 और वैश्विक संकेतों का विश्लेषण
हेडलाइन: ग्लोबल मार्केट की सुस्ती और बजट के टैक्स झटके से सहमे निवेशक!
भारतीय शेयर बाजार में आज आई 1,547 अंकों की बड़ी गिरावट के पीछे केवल घरेलू बजट ही नहीं, बल्कि वैश्विक संकेत भी जिम्मेदार रहे। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारी अल्बर्टो मुसालेम ने संकेत दिए हैं कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती की तत्काल आवश्यकता नहीं है, जिससे वैश्विक तरलता (Liquidity) पर असर पड़ सकता है। 
निवेशकों के लिए मुख्य बातें:
  1. US Fed की सख्ती: फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को 3.50%-3.75% के स्तर पर स्थिर रखने के फैसले ने उभरते बाजारों (Emerging Markets) पर दबाव बढ़ा दिया है।
  2. डॉलर की मजबूती: अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से वैश्विक स्तर पर धातु (Gold-Silver) की कीमतों में सुधार और शेयर बाजारों में मुनाफावसूली देखी गई।
  3. भारत में विदेशी निवेश (FII): बजट में STT (Securities Transaction Tax) बढ़ाए जाने के बाद विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल सकते हैं, जिससे आने वाले हफ्तों में और अस्थिरता बनी रह सकती है। 
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर गहराया संकट: ट्रंप की 500% टैरिफ की धमकी से बाजार में हड़कंप
नई दिल्ली/वॉशिंगटन | 8 जनवरी, 2026
साल 2026 की शुरुआत के साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिका के नवनिर्वाचित प्रशासन ने भारत सहित उन देशों पर कड़े रुख के संकेत दिए हैं जो रूस के साथ व्यापारिक संबंधों को जारी रखे हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में दिए गए एक बयान ने भारतीय शेयर बाजार और व्यापारिक गलियारों में सनसनी मचा दी है। News24 की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि रूस से तेल की खरीद जारी रहती है, तो अमेरिका भारतीय उत्पादों पर 500% तक का टैरिफ (आयात शुल्क) लगा सकता है।
शेयर बाजार में भारी गिरावट
इस खबर के सार्वजनिक होते ही भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखी गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही धड़ाम हो गए हैं। निवेशकों के बीच इस बात का डर है कि यदि अमेरिका इतने बड़े स्तर पर टैरिफ बढ़ाता है, तो भारतीय आईटी कंपनियों, फार्मास्यूटिकल्स और कपड़ा उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडा भारत जैसे रणनीतिक भागीदारों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है।
Hindi News24 के अनुसार, अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी इस कड़े रुख का समर्थन किया है, जिससे स्थिति और भी गंभीर होती दिख रही है। 
क्या है इस तनाव की मुख्य वजह?
इस तनाव का केंद्र ‘रूस-यूक्रेन संघर्ष’ और उसके बाद रूस पर लगाए गए प्रतिबंध हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। अमेरिका इसे रूसी अर्थव्यवस्था को मदद के रूप में देख रहा है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि जो देश रूस के साथ खड़े हैं, उन्हें अमेरिकी बाजार में व्यापार करने की कीमत चुकानी होगी।
भारतीय प्रतिक्रिया और कूटनीतिक प्रयास
भारत सरकार ने इस पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि भारत अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) पर अडिग रहेगा। भारत हमेशा से ही अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देता आया है। हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है ताकि व्यापारिक युद्ध (Trade War) जैसी स्थिति को टाला जा सके।
आम जनता और व्यापार पर असर
यदि 500% टैरिफ लागू होता है, तो:
  • निर्यात में कमी: भारत से अमेरिका जाने वाले सामान महंगे हो जाएंगे, जिससे निर्यातकों को बड़ा घाटा होगा।
  • रुपये की गिरावट: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया और अधिक कमजोर हो सकता है।
  • महंगाई: वैश्विक स्तर पर व्यापारिक अस्थिरता से घरेलू बाजार में भी चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। 
निष्कर्ष
आने वाले कुछ दिन भारत-अमेरिका संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं। क्या भारत रूस के साथ अपने संबंधों में बदलाव करेगा या अमेरिका अपने सख्त फैसलों पर पुनर्विचार करेगा? यह देखना दिलचस्प होगा। वर्तमान में, पूरी दुनिया की नजरें वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच होने वाली अगली उच्च-स्तरीय वार्ता पर टिकी हैं।

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