समानता के अधिकार के लिए भीम आर्मी का पैदल मार्च
बाराबंकी: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के विनियम 2026’ को लेकर उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के कार्यकर्ताओं ने इन नियमों के समर्थन में कलेक्ट्रेट तक विशाल पैदल मार्च निकाला और प्रशासन के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
मुख्य बिंदु:
- समानता की मांग: भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के खिलाफ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए यूजीसी के नए नियमों को बिना किसी देरी के लागू किया जाए।
- सुप्रीम कोर्ट के स्टे का विरोध: प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन नियमों पर लगाए गए अंतरिम स्टे पर चिंता जताई। उनका कहना है कि यह ‘समानता का अधिकार’ सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है और इस पर रोक हटाना सामाजिक न्याय के लिए अनिवार्य है।
- बढ़ते भेदभाव पर चिंता: भीम आर्मी के नेताओं ने आरोप लगाया कि 2019 से 2024 के बीच शैक्षणिक संस्थानों में भेदभाव के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने रोहित वेमुला और दर्शन सोलंकी जैसे छात्रों का उदाहरण देते हुए इसे ‘संस्थागत उत्पीड़न’ रोकने का एकमात्र जरिया बताया।
- बड़े आंदोलन की चेतावनी: बाराबंकी में पैदल मार्च के बाद पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार और प्रशासन ने इन नियमों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया, तो संगठन लखनऊ कूच कर एक बड़ा आंदोलन शुरू करेगा।
पृष्ठभूमि:
यूजीसी ने 15 जनवरी 2026 से नए नियम लागू किए थे, जिसमें विश्वविद्यालयों को दलित और पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए विशेष सुरक्षा तंत्र बनाने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, सवर्ण समाज के कुछ संगठनों ने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए विरोध किया था, जिसके बाद मामला कानूनी प्रक्रिया में उलझ गया है।
यूजीसी ने 15 जनवरी 2026 से नए नियम लागू किए थे, जिसमें विश्वविद्यालयों को दलित और पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए विशेष सुरक्षा तंत्र बनाने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, सवर्ण समाज के कुछ संगठनों ने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए विरोध किया था, जिसके बाद मामला कानूनी प्रक्रिया में उलझ गया है।
बाराबंकी/लखनऊ: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के विनियम 2026’ को लेकर देश भर में घमासान मचा है। बाराबंकी में भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के कार्यकर्ताओं ने इस विनियम के समर्थन में सड़कों पर उतरकर अपना शक्ति प्रदर्शन किया। संगठन ने जिलाधिकारी आवास तक पैदल मार्च निकाला और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए इन नियमों को तुरंत प्रभावी बनाने की मांग की।
प्रमुख बिंदु और विवाद की वजह:
भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा कवच: भीम आर्मी के प्रदेश महासचिव और अन्य नेताओं का कहना है कि यह विनियम एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के खिलाफ होने वाले जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए एक अनिवार्य सुरक्षा कवच है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में कैंपस में जातीय उत्पीड़न के मामलों में 118% की वृद्धि देखी गई है।
सुप्रीम कोर्ट का स्टे: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इन नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए अंतरिम रोक (Stay) लगा दी है कि ये प्रावधान ‘अस्पष्ट’ हैं और इनका दुरुपयोग हो सकता है। भीम आर्मी इसी स्टे को हटाने की मांग कर रही है।
नगीना सांसद की हुंकार: भीम आर्मी के संस्थापक और नगीना सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर इस विनियम को सभी संस्थानों में लागू करने की अपील की है। उन्होंने 11 फरवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की घोषणा की है।
सवर्ण समाज का विरोध: दूसरी ओर, ‘सवर्ण सेना’ और सामान्य वर्ग के कई संगठनों ने इसे ‘काला कानून’ करार दिया है। उनका तर्क है कि ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई और विभाजन पैदा कर सकते हैं।
क्या है यूजीसी विनियम 2026?
यह नियम विश्वविद्यालयों को कैंपस में इक्विटी कमेटी (Equity Committee) और 24/7 हेल्पलाइन बनाने का निर्देश देता है। साथ ही, भेदभाव की शिकायतों पर 24 घंटे के भीतर कार्रवाई और 15 दिनों में समाधान सुनिश्चित करने की समय सीमा तय की गई है।
आगामी रणनीति: बाराबंकी के बाद भीम आर्मी अब राजधानी लखनऊ और भोपाल में बड़े घेराव की तैयारी कर रही है। संगठन ने चेतावनी दी है कि जब तक इन नियमों को लागू नहीं किया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।